Tuesday, September 29, 2009

कौमार्य पर उठा बवाल



 पुरुषों के कौमार्य का भी कोई फुलप्रूफ तकनीकी परीक्षक  बन पाता  तो इस  समाचार से खेद न होता क्योंकि जिस व्यभिचार के दंड की व्यवस्था के लिए यह सब किया जा रहा है, उस व्यभिचार में क्या स्त्री अकेली भागीदार होती है ? साथी भागीदार के लिए दंड कि व्यवस्था और परीक्षण का क्या ?  :  -



 कौमार्य पर मचा कुहराम




मिस्र के एक जाने-माने इस्लामी विद्वान ने माँग की है कि जो महिलाएँ एक उपकरण सहारे कौमार्य का ढोंग करती हैं उन्हें मृत्युदंड दिया जाना चाहिए.



मिस्र के अख़बारों में ख़बर छपी है कि अरब देशों के बाज़ार में चीन में बना उपकरण उपलब्ध है जिसकी मदद से महिलाएँ अपने पति को ऐसा आभास दे सकती हैं कि उन्होंने पहले कभी यौन संबंध नहीं बनाए.



इस उपकरण से लाल रंग का एक तरल निकलता है जो पहली बार संभोग के समय होने वाले रक्तस्राव का आभास देता है.



यह उपकरण महँगी सर्जरी का बेहतर और सस्ता विकल्प है. अरब जगत में कौमार्य या वर्जिनिटी को लेकर लोगों के विचार काफ़ी रुढ़िवादी हैं और ऐसे ऑपरेशन चोरी-छिपे होते हैं.



प्रोफ़ेसर अब्दुलमती बायुमी का कहना है कि जिन लोगों ने इस उपकरण का आयात किया है वे मिस्र के समाज को भ्रष्ट बना रहे हैं, यह एक बड़ा अपराध है इसलिए इसकी सज़ा मौत होनी चाहिए.



उनका कहना है कि इस्लाम में व्यभिचार बहुत बड़ा गुनाह है और समाज को इसे बर्दाश्त नहीं करना चाहिए.



मिस्र की संसद में भी इस उपकरण के उपकरण के आयात पर रोक लगाने की माँग की गई है.



ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि कई अरब देशों में ये उपकरण पंद्रह डॉलर में बिक रहे हैं.





12 comments:

  1. बहुत ही अपमान जनक। कौन हैं ये कौमार्य भंग करने वाले?

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  2. बेहद अफसोसजनक ---मेरा तो यह पढ़ कर सिर फटा जा रहा है।
    डियर द्विवेदी जी एक जाने माने वकील हैं ---उन्होंने अपनी टिप्पणी में कितना सही लिखा है ---कौन हैं ये कौमार्य भंग करने वाले ?

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  3. इन आदिकालीन विषयों पर सोचना ही समय बर्बाद करना है !

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  4. शर्मनाक ...वीभत्स ..!!

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  5. शर्मनाक कौमार्य भंग करने वालों को ही एक औरत को सबूत देना पडे इस से बडी औरत की त्रास्दी क्या ह्aो सकती है ?

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  6. यदि अपना कौमार्य साबित करने के लिए स्त्री को उपकरण की मदद लेनी पढ़ रही है तो इसका क्या मतलब ? हम चंद्रमा पर पहुँच गए मगर स्त्री तो अब भी वहीँ की वहीँ खड़ी है . अग्नि परीक्षाएं दे रही है और परीक्षा फल उसके खिलाफ ही घोषित हों रहे है ! पुरुष वह भी कानून बनाने में ही लगा है . उसका भी कोई विकास नहीं हुआ अब तक !

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  7. राष्ट्र कवि दिनकर ने कुंती के कौमार्य को सम्मान दिया .कहा वो माता कुंती सती कुंवारी (रश्मिरथी )..आज ये जानकर बहुत दुःख हुआ कि दुनिया के हर कोने में स्त्रियों को कई परीक्षाएं देनी पड़ रही है .कौमार्य-भंग ... क्या उन्हें मालूम नहीं की प्रकृति का बस एक स्वाभाविक साहचर्य है .एक स्त्री और पुरूष के अपने निजी जीवन का अदभूत सौंदर्य समागम .और कौमार्य तो कोई विषय वस्तु है ही नही यहाँ ,यह तो मात्र उन पुरुषों की कुत्सित मानसिकता है जो किसी के निजी जीवन को सार्वजानिक भोग की वस्तु बनाने पर तुले हैं .और कौर्मार्य की परीक्षा आख़िर क्यों ! किसी के दैहिक कौमार्य के बारे में तो जान सकते हो ..फ़िर तुम मानसिक कौमार्य की भी तो बात करोगे ....कहाँ उलझे हैं ये लोग ... मरियम के कौमार्य पर भी प्रश्न उठाओगे तुम लोग ....कोई ऐसा उपकरण हो के जरा इन् पोंगा पंथों के मन चल रहे कौमर्यत्व भंग करने के कितने बार ख़याल आए इसका भी पता चले और कितनी बार ये ऐसा कर चुके हैं इसका भी पता चले ..... SATYA PRAKASH MISHRA

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  8. व़ास्‍तविकता तो यह है कि पुरुष महिला से बेहद डरा हुआ है, इसलिए उसे तो मासूम सी कठपुतली चाहिए। वह कोई भी रिस्‍क नहीं लेना चा‍हता। मजेदार बात तो यह है कि यह केवल एक पुरुष की मानसिकता नहीं है, यह सामूहिकता की मानसिकता है। मुझे तो लगता है कि मनोवैज्ञानिकों का सारा ध्‍यान पुरुष की मानसिकता का इलाज करने में लगना चाहिए। जहाँ पुरुष ज्ञानवान हो गया है वहाँ ऐसी विकृति नहीं है लेकिन जहाँ न शिक्षा है और न ही ज्ञान वहाँ तो पुरुष महिला को हव्‍वा समझता है। उन्‍होंने प्रारम्‍भ से ही सारे नियम बनाए हैं कि वह उनकी मुठ्ठी में रह सके। हम जानते हैं कि अफगानिस्‍तान, मिस्र ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ विकृत मानसिकता की अति है।

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  9. bahut hi apmaanjanak hai yeh...... to..... pata nahi yeh log kis duniya mein jee rahe hain......? yeh to bahut hi sharmnaak hai....... aise samaaj ko kya kahenge? yeh to uparwala hi jaane......

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  10. स्त्री की बदतर से बदतर किसी दशा पर स्तब्ध होने जैसा कुछ नहीं है वस्तुतः | वह आज भी जानवरों से अधिक बुरी अवस्था में जीने को बाधित है.

    लीबिया आदि देशों में विवाह की प्रथा का विवरण जानने वाले लोग बेहतर जानते हैं कि वहाँ सारे सगे संबन्धी तब तक नीचे आँगन में जुटे रहते हैं, जश्न नहीं आरम्भ होता, जब तक विवाह की अगली सुबह उठकर वर रक्त रँगी सफ़ेद चादर ऊपर से नीचे आँगन में नहीं फ़ेंक देता. सार्वजनिक स्तर पर स्त्री की निजता की ऐसी धज्जियाँ इसी दीन दुनिया में उडाई जाती हैं.

    और तथाकथित भारतीय समाज में स्त्री की दशा देखनी हो तो उसके अपने माता पिता द्वारा ही उसका धरती पर आने से पहले प्राणांत कर देने से उसकी विरह व्यथा आरंभ होती है.

    आगे क्या कहिए.... कही न जाए.....

    हजारी प्रसाद द्विवेदी और महादेवी याद आते हैं.

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  11. -male has used ,abused and controlled the second sex n its highly deplorable n condemning in every aspect... females need to oppose it uncompromisingly n need of the hour is to leave the cozy drawing rooms by the empowered women !!!

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आपकी प्रतिक्रियाएँ मेरे लिए महत्वपूर्ण हैं।अग्रिम आभार जैसे शब्द कहकर भी आपकी सदाशयता का मूल्यांकन नहीं कर सकती।आपकी इन प्रतिक्रियाओं की सार्थकता बनी रहे इसके लिए आवश्यक है कि संयतभाषा व शालीनता को न छोड़ें.

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