Thursday, January 1, 2009

पहली भोर

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एकालाप -१४




पहली भोर



बरस भर वह
उगलता रहा मेरे मुँह पर
दिन भर का तनाव
हर शाम !


आज
नए बरस की पहली भोर
मैंने दे मारा
पूरा भरा पीकदान
उसके माथे पर !!


कैसा लाल - लाल उजाला
फ़ैल गया सब ओर !!!


- ऋषभ देव शर्मा



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