Thursday, January 5, 2012

"स्‍त्री होकर सवाल करती है....!" : "कविता समय "




"स्‍त्री होकर सवाल करती है....!"


यदि आप जयपुर में हैं तो अवश्य सम्मिलित हों .....

आप सादर आमंत्रित हैं ...............................


"स्‍त्री होकर सवाल करती है....!"
(127 रचनाकारों की स्‍त्री विषयक कविताओं का संग्रह)


प्रकाशक - बोधि प्रकाशन (जिन्होंने प्रत्येक पुस्तक का दाम 100/- मात्र की अपनी प्रतिबद्धता के कारण नया कीर्तिमान स्थापित कर एक नई परंपरा को जन्म दिया व हिन्दी पुस्तकों के क्षेत्र में नई क्रान्ति के बीज रोप कर सर्वत्र ख्याति पाई है )

संपादक - डॉ लक्ष्‍मी शर्मा

पेपरबैक/प्रथम संस्‍करण - जनवरी 2012

पृष्‍ठ  - 384

मूल्‍य - 100 रुपये मात्र

लोकार्पण  - दिनांक 8 जनवरी 2012, रविवार, सुबह 11.45, ''कविता समय'' कार्यक्रम के कविता पाठ सत्र में

स्‍थान: राजस्‍थान हिन्‍दी ग्रंथ अकादमी, झालाना सांस्‍थानिक क्षेत्र, जयपुर


मुझे हर्ष है कि मेरी कविताएँ भी इस संकलन में सम्मिलित हैं।



384 पृष्ठ की इस पुस्तक का मूल्‍य 100 रुपये मात्र है (डाक से मँगाने पर पैकेजिंग एवं रजिस्‍टर्ड बुकपोस्‍ट के 50 रुपये अतिरिक्‍त)।

 इसे Bodhi Prakashan ने प्रकाशित किया है। 

उनके "बोधि प्रकाशन, एफ 77, करतारपुरा इंडस्ट्रियल एरिया, बाईस गोदाम, जयपुर 302006 राजस्‍थान। संपर्क दूरभाष : 099503 30101, 08290034632 (अशोक) " के पते से इसे क्रय किया जा सकता है। 

जो भी मित्र इस पुस्तक की समीक्षा/ पुस्तक चर्चा / रिव्यू इत्यादि लिखें, उनसे निवेदन है कि कृपया उसे Maya Mrig जी, बोधि प्रकाशन तथा मुझसे + अन्य सम्मिलित लेखकों से अवश्य बाँटें/ सूचित करें।

कविता समय कार्यक्रम की अद्यतन जानकारियों के लिए देखें -  यह लिंक 

4 comments:

  1. Waah...

    विश्व संस्कृति की तरह ही भारतीय संस्कृति भी बड़ी अद्भुत है।
    http://mypoeticresponse.blogspot.com/2012/01/blog-post.html

    ReplyDelete
  2. जरूर पढ़ना चाहेंगे इस पुस्तक को ...
    आपको बहुत बहुत बधाई

    ReplyDelete
  3. badhai aapko ..mujhe bhi bahut khushi hai ki meri rachnayen bhi isme shamil ki gai ....

    ReplyDelete

आपकी प्रतिक्रियाएँ मेरे लिए महत्वपूर्ण हैं।अग्रिम आभार जैसे शब्द कहकर भी आपकी सदाशयता का मूल्यांकन नहीं कर सकती।आपकी इन प्रतिक्रियाओं की सार्थकता बनी रहे इसके लिए आवश्यक है कि संयतभाषा व शालीनता को न छोड़ें.

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